त्रिनेत्र :साहेब आपका माँ अहिल्या की नगरी में स्वागत वंदन अभिनंदन

साहेब आप पधारे आपका माँ अहिल्या की नगरी में आपका स्वागत वंदन अभिनंदन आइये साहेब आपके इंदौर पधारने के साइड इफ़ेक्ट से भी रूबरू करवाए आप तो देश के प्रधान है साहेब आप को तो देश के पूरे मुल्क की खेर ख़बर रखना होती है इसलिए सब दूर जाना भी पड़ता है क्या आपको मालूम है .

आपके इंदौर पधारने के २ दिन पहले से ही यह पूरा शहर दहशत में आ गया था पूरे शहर के चौराहों से लेकर सड़कों तक गली मोहल्लों की छत पर केवल ख़ाकी ही ख़ाकी नज़र आ रही थी क्यों की आपका आयोजन शहर के एक दम बीचों – बीच नेहरु स्टेडीयम में रखा गया था इसलिए आपके आगमन से लेकर प्रस्थान तक पूरा शहर बंधक जैसा बना लिया गया था कभी रीहर्शल के नाम पर तो कभी आपके नाम पर जिस रास्ते से आपको गुज़रना था वहाँ घर दुकान मकान सब ख़ाकी के साये में था.

आपकी सुरक्षा में जो लोग तेनात थे वह भी अपने आपको प्रधानमंत्री से कम नहीं समझ रहे थे आप जब दिल्ली से उड़े नहीं थे तब भी इंदौर में हमें इनकी बदतमीज़ी का सामना करना पड़ रहा था.

लकीर के फ़क़ीर बनी यह ख़ाकी चौराहों पर बदतमीज़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी आप ने भले ही वी आइ पी कल्चर हटाने की पहल की हो लेकिन पिछले चार साल की फ़ज़ीहत यंहाँ तो २ दिन में ही देखने को मिल गई सब जानते है आयोजन सरकारी था पर पूरा चुनावी था घोषणावीर को आपकी गुड बुक में अपने नम्बर बड़ाने थे.

इसलिए १६ रिमोट आपसे एक साथ दबवालिए हज़ारों करोड़ों की घोषणा आप ने भी तो कर डाली आपको भी तो आपकी २०१९ की एफडी की चिंता है आयोजन केंद्र – राज्य सरकार का था लेकिन लगा ऐसे जैसे कोई चुनावी सभा चल रही हो खेर छोड़िए चुनाव सर पर है इसलिए अब सभी आयोजन ऐसे ही होंगे साहेब आप इन्वेस्टर समिट में भी इंदौर आए थे.

लेकिन शहर को पता भी नहीं चला आप कब आकर चले गए इस बार आपके आगमन से लेकर प्रस्थान तक पूरा शहर सहमा सहमा सा रहा माना की आप की सुरक्षा में यह सब कुछ होना भी चाहिए लेकिन आप की सुरक्षा के नाम पर यह शहर क्यों डरा डरा रहे ?

काहाँ गए वह शहर के जनहित याचिका के ठेकेदार समाज सेवी जो ट्रैफ़िक के नाम पर धर्म जुलूस जलसे को लेकर बड़ी बड़ी दलील देते है अदालत की शरण लेते है लेकिन भाजपा के इस आयोजन को लेकर सबकी बोलती क्यों बंद है यह आयोजन सूपर कॉरिडर या शहर के बाहर क्यों नहि हुआ चुनावी साल है यह परंपरा चल पड़ेगी और अब आए दिन शहर के लोगों ऐसी मुसीबत से तो सामना करना पड़ सकता है ख़ाकी भी भला क्या करे खादी के सामने मजबूर है। त्रिनेत्र : नियम शर्तें लागू।

साभार- राजा शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार

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इंदौर