11 रहस्यमय मौत के पीछे आखिर वो बाबा कौन

नई दिल्ली। रहस्यमय तरीके से संत नगर के भाटिया परिवार के 11 लोगों की मौत की मिस्ट्री तीसरे दिन भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस इसे अंधविश्वास में खुदकुशी बता रही है लेकिन आसपास रहने वालों से लेकर अन्य लोगों के गले यह बात नहीं उतर रही।

अभी तक वह कथित बाबा भी परदे के सामने नहीं आ पाया है जिसके चक्कर में इस परिवार का सदस्य ललित रहता था जिसके कथित कहने में आकर उक्त मौतें होने की बात कही जा रही है।

पुलिस की खुदकुशी की कहानी के विपरीत लोग एक दूसरे से सवाल कर रहे हैं कि आखिर ऐसा कैसे संभव है कि चंद मिनट पहले तक सामान्य दिखने वाले भाटिया परिवार ने अचानक खुदकशी करने का सामूहिक निर्णय ले लिया।

इधर ललित की बहन सुजाता का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। उनके परिवार का कोई भी सदस्य किसी बाबा के संपर्क में नहीं था और न ही मोक्ष की प्राप्ति के लिए उन्होंने ऐसा कुछ किया है।

ये हत्या है, इसकी जांच होनी चाहिए। भाटिया परिवार के आसपास की महिलाओं का कहना है कि पूरा परिवार पिछले 20 साल से यहां रह रहा है। सभी लोग आम लोगों की तरह सामान्य जीवन जीते थे।

उनकी बातचीत में तंत्रमंत्र की चर्चा तक नहीं होती थी। ललित की भांजी प्रियंका जॉब करती थी। दोनों भाई कारोबार करते थे। पिता की आत्मा आती थी

पुलिस की मानें तो भाटिया परिवार के घर से मिले सबूत इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि मृतकों का अध्यात्म की ओर ज्यादा झुकाव था।
यही नहीं, परिवार तांत्रिक विद्या पर भी विश्वास करता था, इसलिए माना जा रहा है कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए अंधविश्वास में सभी ने स्वेच्छा से मौत को गले लगा लिया।

पुलिस अधिकारी भी इस घटना को अध्यात्म से जोडक़र देख रहे हैं। हालांकि पुलिस की जांच अभी जारी है। अभी उस कथित बाबा के बारे में भी कुछ जानकारी हाथ नहीं लगी है

जिसके चक्कर में कथित तौर पर ललित था। परिवार के सभी सदस्य नियमित पूजा-पाठ करते थे। वहीं, समय-समय पर भंडारे का आयोजन भी किया जाता था। नारायण देवी के छोटे बेटे ललित ने गत पांच वर्ष से मौन व्रत धारण कर रखा था।

उनकी घर के भूतल पर ही लकड़ी व प्लाई की दुकान थी, जबकि बगल में बड़े भाई भुवनेश परचून की दुकान चलाते थे। इन दोनों दुकानों के बीच एक प्लाई का बोर्ड लगा था। उसपर अक्सर प्रियंका या फिर परिवार का कोई अन्य सदस्य रोजाना कोई-कोई न कोई आध्यामिक विचार अथवा श्लोक इत्यादि लिखता था।​

22 को दे गए रोशनी

तमाम अनसुलझे सवालों के बीच य​ह परिवार 22 लोगों को रोशनी दे गया हैै। परिवार के इन 11 लोगों की आंखें एक आई बैंक को दान कर दी गई। मृत बुजुर्ग नारायण देवी (77) ने कहा था कि मरने के बाद उनकी आंखें दान कर देना। उनकी इसी बात को अंतिम इच्छा समझ कर उनके साथ परिवार के अन्य 10 सभी सदस्यों की आंखें भी दान कर दी गयी। मृतकों की आंखें गुरु नानक आई सेंटर में सुरक्षित रखवा दी गई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन आंखों से करीब 22 लोग देख सकेंगे। गौरतलब है कि रविवार को बुराड़ी के एक ही परिवार के 11 लोग मृत पाए गए। 10 सदस्यों की आंखें और मुंह कपड़ों से बंधे हुए थे और उनके शव झूल रहे थे, जबकि 77 साल की एक महिला फर्श पर मृत पाई गई। उनकी आंखों और मुंह पर पट्टी नहीं बंधी थी, बच्चों के हाथ-पांव बंधे हुए थे।

Spread the love

9

इंदौर