अपने एक्सीडेंट को आशिर्वाद मानती है आशिकी एक्ट्रेस अनु अग्रवाल, दुर्घटना से पहले ही कर लिया था फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री अनु अग्रवाल ने साल 1990 में फिल्म आशिकी से बॉलीवुड में कदम रखा था। अपनी पहली ही फिल्म से उन्होंने इतनी सुर्खियां बटोरी कि उन्हें आज भी फिल्म आशिकी के नाम से जाना जाता है। उन्होंने और भी कई फिल्मों में काम किया, लेकिन एक एक्सीडेंट ने उनकी पूरी जिंदगी को बदलकर रख दिया है। हालांकि अब उन्हें फिल्मी दुनिया को अलविदा कहे 20 साल से ज्यादा हो चुके हैं।

अनु अग्रावल ने अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया को इंटरव्यू दिए एक इंटरव्यू में अपने फिल्मी सफर के अलावा निजी जिंदगी को लेकर भी ढेर सारी बातें की हैं। उन्होंने बताया कि एक एक्सीडेंट के बाद लंबे समय तक अपना इलाज करवाया और उसके बाद उन्होंने फिल्मी पर्दे को भी अलविदा कह दिया, लेकिन अब अनु अग्रवाल ने फिल्मी पर्दे को हमेशा से छोड़ने की वजह का खुलासा किया है।

अनु ने बताया कि आशिकी उलकी एक म्यूजिकल फिल्म थी, जिसके गाने आज भी सुपरहिट माने जाते हैं। उनसे पूछा गया है कि इतना सफलता हासिल करने के बावजूद उन्होंने अभिनय की दुनिया को क्यों छोड़ दिया ? इस पर अनु अग्रवाल ने कहा, ‘साल 1994 में रिलीज हुई एक फिल्म को 1995 में कान फिल्म समारोह दिखाया गया था। 1993 में मैंने फिल्में साइन करना बंद कर दिया था। मेरे मन में कुछ और करने का ख्याल था।’


अनु ने आगे कहा, ‘ज्यादातर समय मैं अपने दिल से सोचती हूं और दिमाग पर भरोसा नहीं करती। इसलिए मैंने फिल्में साइन करना बंद कर दिया था और मेरे पास आने वाले ऑफर्स को लेना भी बंद कर दिया था। जब साल 1993 में फिल्म ‘खलनायिका’ के लिए फिल्मफेयर में नामांकित हुई तो एक अखबार के लेख का शीर्षक था, ‘अनु ने इसे अपनी शर्तों पर बनाया है’। इसी समय के आसपास मैंने अपनी आखिरी कवर स्टोरी एक पत्रिका के साथ की थी, जिसमें इस तथ्य पर प्रकाश डाला गया था कि मैं महिलाओं से प्यार करती हूं और मेरा पहला प्यार एक महिला है जो मेरी मां है।’

अनु ने आगे कहा, ‘1992 में ही मुझे लगने लगा था कि मुझे कुछ और चाहिए। मुझे नहीं पता था कि यह क्या था लेकिन मैं हमेशा कुछ और चाहती थी। लेकिन ऐसा करने के लिए मुझे कुछ समय के लिए इस मनोरंजन की दुनिया से बाहर जाना पड़ा। यह जाने बिना कि इससे कैसे जाना है। जब मैंने लोगों को अपने इस फैसले के बारे में बताया तो किसी ने मुझ पर विश्वास नहीं किया। वह सोचते थे कि क्या मैं इतनी पागल हो गई हूं कि अभिनय की दुनिया छोड़ रही हूं क्योंकि मुझे एक ऐसी थाली मिली थी जिसका लोग केवल सपना देखते हैं।’
अनु अग्रवाल ने आखिरी में कहा, ‘कान एक अद्भुत अनुभव था और तभी मैंने सोचा कि मुझे थोड़ा और विस्तार करना चाहिए और विकसित होना चाहिए। यह अजीब लग सकता है लेकिन मैं ऐसी ही हूं।

मैंने हमेशा विस्तार के बारे में सोचा है। कई लोगों ने मेरा विरोध किया लेकिन मैंने ब्रेक ले लिया। वहीं कार दुर्घटना से मैं हैरान हो गई थी। मैंने अपने आस-पास के लोगों को निराशा से रोते देखा। लेकिन अब, समय के साथ, मुझे लगता है कि दुर्घटना एक वरदान थी। मुझे लगता है कि अराजकता और मुश्किलों से सुंदरता पैदा होती है, और आप समझते हैं कि सकारात्मकता क्या है। इसलिए जब नकारात्मकता होते हैं, तो आप सकारात्मकता को समझते हैं। यह प्रकृति का विपरीत नियम है। तो, कुल मिलाकर, यह बहुत अच्छा था। दुर्घटना के आशीर्वाद से मेरी जिंदगी में बहुत सारी चीजें ठीक हो गईं।’

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इंदौर