Jun 19 2019 /
10:33 PM

मप्र में वैध नही होगी 6 हजार अवैध कालोनियां, हाई कोर्ट ने पलटा शिवराज सरकार का फैसला, “धारा” 15ए को किया शून्य

ग्वालियर। इंदौर सहित मप्र में करीब छह हजार “अवैध” कालोनियां अब “वेध” नहीं हो पाएगी। सोमवार को आये फैसले में ग्वालियर हाई कोर्ट ने शिवराज सरकार का फैसला पलटते हुए “धारा” 15ए को शून्य घोषित कर किया।
इस आदेश के बाद अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के लिए अब तक की गई संपूर्ण प्रक्रिया ही निरस्त हो गई है। न्यायालय ने शासन को यह स्वतंत्रता दी है कि नगर निगम एक्ट की “धारा” 292 ई के प्रावधानों के तहत अवैध कॉलोनियों को वैध करने की कार्रवाई की जा सकती है।

जस्टिस संजय यादव एवं जस्टिस विवेक अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता का कहना था कि चुनाव से पूर्व भाजपा सरकार ने यह घोषणा चुनाव में लाभ लेने के लिए की थी। याचिकाकर्ता ने नगर निगम के कॉलोनाइजर रुल 15 ए की वैधता को चुनौती देते हुए कहा था कि राज्य शासन द्वारा अवैध कॉलोनियों को वैध करने से प्रदेश में अवैध कॉलोनियां विकसित करने वालों को बढ़ावा मिलेगा। इससे लोग वैध कॉलोनी के बजाए अवैध कॉलोनियों का विकास करेंगे और फिर उसे वैध करा लेंगे।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में ऐसे सरकारी सर्वे नंबर पेश किए,जिन्हें नियम “विरूद्ध” वैध कॉलोनियों में शामिल कर दिया गया। जिसके बाद सभी तथ्य जानने के बाद हाईकोर्ट ने शिवराज सरकार की “धारा-15” ए को खत्म कर दिया ।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि अवैध कॉलोनियों को बसाने के दौरान जिम्मेदारों अफसरों के खिलाफ भी निगम की धारा 292 ई के तहत कार्रवाई की जाएग। इसके लिए दोषी उस सर्किल के डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार,आरआई, अवैध कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

उल्लेखनीय हैं कि 8 मई 2018 को प्रदेश भर की अवैध कॉलोनियों को वैध करने की घोषणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी। इसमे मप्र की छह हजार अवैध कालोनियां वैध होना थी। इनमे इंदौर की करीब 111 कालोनियां प्रक्रिया में आ गई थी।

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इंदौर