Oct 17 2019 /
1:26 AM

9 साल संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी जीती नौकरी की लड़ाई, पुलिसकर्मी को वापस सेवा में लेने के आदेश

इंदौर। नौकरी से निकाले जाने के विरुद्ध एक पुलिसकर्मी ने हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और अंततः 9 साल बाद जीत हासिल की। सुप्रीम कोर्ट ने उसे पुनः सेवा में रखने के दिए हैं।

मामला इस प्रकार है कि एसएएफ में पदस्थ हेड कांस्टेबल रवींद्र अग्निहोत्री को एसएएफ के द्वारा संचालित पेट्रोल पंप पर पदस्थ किया गया था। सन 2010 में पेट्रोल टैंक में गड़बड़ी के आरोप में पहले तो उसे हेड कांस्टेबल से पदावनत करके कांस्टेबल बना दिया गया बाद में उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दे दी गई।

इस आदेश के विरुद्ध उक्त हेड कांस्टेबल ने एडवोकेट पुष्यमित्र भार्गव के माध्यम से 2011 में इंदौर हाई कोर्ट में मामला लगाया। इसमें कहा गया कि पेट्रोल पंप इंचार्ज पर कोई कार्रवाई नहीं की गई वही बिना तकनीकी जांच कराएं उसे गलत ढंग से नौकरी से हटाया गया।

सन 2018 में सिंगल बेंच ने पुलिसकर्मी के पक्ष में फैसला दिया। इसके विरुद्ध शासन ने इंदौर हाई कोर्ट में ही अपील की लेकिन उसमें भी हारा।

तत्पश्चात शासन सुप्रीम कोर्ट गया लेकिन सभी 3 दिन पहले शीर्ष कोर्ट ने भी शासन की दलील को नहीं मानते हुए इंदौर हाई कोर्ट के आदेश को यथावत रखते हुए उसे पुनः सेवा में लेने के आदेश दिए हैं।

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इंदौर