Jun 19 2019 /
10:10 PM

इंदौर के गणेशगंज के रहवासियों को पर्याप्त अवसर दिए बिना कोई तोड़फोड़ न करे निगम- हाई कोर्ट

इंदौर। इंदौर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित गणेशगंज के रहवासियों हाई कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने कहा है कि रहवासियों को पर्याप्त अवसर दिए बिना नगर निगम कोई तोड़फोड़ न करे। गौरतलब है कि गणेशगंज छेत्र में 2 वर्ष पूर्व सड़क चौड़ीकरण के चलते कई रहवासियों के आशियाने उजाड़ दिए गए थे जिसमे कई के घर आधे से अधिक तोड़ दिए गए थे जो 30 वर्षो से भी अधिक से निवासरत थे। गत 25 मई 19 को निगम भवन अधिकारी के द्वारा पुनः नोटिस देते हुए 3 दिन में बेकलेन का निर्माण हटाने का नोटिस दिया गया जिसमें कहा गया कि न हटाने की दशा में निगम का रिमूवल अमला बलपूर्वक कर्यवाही करेगा।

इसमे 3 जून 2019 तक की मोहलत दी गई थी, जिसके खिलाफ रहवासी कुंदन उपाध्याय और अन्य ने अधिवक्ता मनीष यादव और विनोद द्विवेदी के माध्यम से याचिका दायर की थी। अधिवक्ता यादव ने तर्क रखे रहवासियों को बिना अवसर प्रदान किए सीधे नोटिस थमा दिए गए है, उन्होंने कोई अतिक्रमण नहीं किया है। किसी धर्मेश मोदी की याचिका में अक्टूबर 2018 को आधार बनाते हुए नोटिस थमाए गए जिसमे न्यायालय ने बैकलेन के कब्जे हटाने का निर्देश दिया था जिसमे याचिकाकर्ता पार्टी भी नही थे।

ऐसे में कैसे बिना अवसर दिए हुए इनके आशियाने उजाड़े जा सकते है जबकि सभी की रजिस्ट्री है और वे 30 साल से रहवासी है। वही दूसरी और निगम के अधिवक्ता ऋषि तिवारी ने पक्ष रखा कि रहवासियों को पूर्व में भी अवसर दिया था उसके बाद ही नोटिस दिए है। एडवोकेट मनीष यादव ने बताया कि न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति सुनील कुमार अवस्थी की अवकाशकालीन डिवीजन बैंच ने निगम को निर्देशित किया वे रहवासियों को पर्याप्त अवसर दे, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़ फोड़ न करे वही रहवासियों को भी मय दस्तावेज 7 दिन में अपना पक्ष निगम भवन अधिकारी के समक्ष रखने को कहा है।

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