Jan 24 2019 /
11:50 AM

3 नवंबर के बाद खरीदे गए सैंकड़ो वाहन टैक्स जमा होने के बाद भी नहीं हो रहे है रजिस्टर्ड, मामला हाईकोर्ट पहुंचा

इंदौर। गत 3 नवंबर के बाद खरीदे गए वाहनों को आरटीओ विभाग रजिस्टर्ड नहीं कर रहा है जबकि वाहन खरीदने वालों ने ना केवल उसका आजीवन टैक्स जमा कर दिया बल्कि एक साल का इंश्योरेंस भी जमा कर दिया है।

इसका कारण बीमा कम्पनियों द्वारा एकमुश्त तीन साल का बीमा ना किया जाना है। वाहन रजिस्टर्ड ना होने से कमर्शियल वाहनों को ज्यादा दिक्कतें आ रही है और ऐसी सैंकड़ो नई गाड़िया खड़ी हो गयी है।

इसके चलते मामला हाई कोर्ट पहुंचा है, जिस पर आगामी सोमवार को वेकेशन बेंच सुनवाई करेगी। दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल में एक निर्णय दिया गया है जिसमें वाहनों का 3 साल का इंश्योरेंस कराना जरूरी किया गया है।

इस निर्देश का पालन करने के लिए सभी राज्यों को पत्र लिखे गए है। (देखें पत्र की कॉपी)। इसी के चलते 3 नवंबर के बाद से खरीदे गए नए वाहन रजिस्टर्ड नहीं हो रहे हैं।

ऐसे ही एक मामले में एक निजी ट्रेवल्स की ओर से इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाली अधिवक्ता रेखा श्रीवास्तव के अनुसार पूर्व से तय प्रक्रिया के अनुसार आरटीओ द्वारा आजीवन रोड टैक्स डीलर से गाड़ी उठाने समय जमा कर लिया जाता है और एक साल की बीमा राशि भी जमा हो जाती है।

अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार 3 साल का बीमा कराया जाना जरूरी है लेकिन बीमा कंपनी का कहना है कि अभी उनके पास ऐसा फार्मेट नहीं आया है कि एकमुश्त 3 साल का बीमा कर सकें, इस कारण आरटीओ गाड़ियां रजिस्टर्ड नहीं कर रहा है।

आजीवन रोड टैक्स राशि जमा कर देने और एक साल का बीमा होने के बावजूद गाड़ी रजिस्टर्ड ना होने से नए खरीदे गए कमर्शियल वाहनों को सबसे अधिक दिक्कत आ रही है क्योंकि बिना रजिस्ट्रेशन वे सड़क पर नहीं चल पा रही है। इस वजह से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

महाराष्ट्र में अंडरटेकिंग से कर रहे रजिस्टर्ड

अधिवक्ता श्रीवास्तव का कहना है कि महाराष्ट्र में ऐसे ही मामलों में वाहन चालको से अंडरटेकिंग लेकर गाड़ियां रजिस्टर्ड की जा रही है। जब तक बीमा कंपनियां 3 साल के बीमे करना शुरू करें तब तक मप्र में भी इस तरह की अंडरटेकिंग के आधार पर गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाना चाहिए ताकि इन्हें सड़क पर चला जा सके।

इसकी अभाव में सैकड़ों गाड़ियां अकेले इंदौर में घर खड़ी हुई है। याचिका पर गत गुरुवार को वेकेशन बेंच में सुनवाई थी, अब सोमवार 31 दिसंबर को पुनः वेकेशन बेंच सुनवाई होगी।

इस संबंध में मप्र के परिवहन आयुक्त डॉ शैलेंद्र श्रीवास्तव से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हम कार्रवाई कर रहे हैं।

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