Sep 19 2019 /
4:29 PM

अब उठी इंदौर खंडपीठ को हाई कोर्ट की मुख्य पीठ बनाने की मांग, जबलपुर से ज्यादा सुविधाएं इंदौर में

इंदौर। अब मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ को मुख्य पीठ बनाने की मांग भी उठी है। इसके पीछे जबलपुर से ज्यादा सुविधाएं इंदौर में होने का तर्क दिया जा रहा है।
मप्र के छह जिलों हरदा , हरसूद , खंडवा , बुरहानपुर , सीहोर और आष्टा को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ से जोड़े जाने के प्रस्ताव से मचे बवाल के बाद अब एक नई कवायद शुरू की जा रही है ।

वर्तमान में मप्र हाई कोर्ट की जो मुख्य पीठ जबलपुर में है, उसकी जगह इंदौर को मुख्यपीठ बनाने के लिए भी आंदोलन शुरू किया जा सकता है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि जबलपुर की तुलना में इंदौर सुविधाओं की दृष्टि से काफी आगे है ।
उल्लेखनीय है कि दूरी का हवाला देकर उक्त छह जिले इंदौर खंडपीठ में शामिल करने के विधि व विधायी कार्य विभाग के प्रस्ताव के बाद जबलपुर व इंदौर के वकीलो में शुरू हुई जंग के चलते एक दिन पहले आंदोलन की शुरुआत हो गई है।

इंदौर में अब अगले चरण में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन उपाध्यक्ष अमरसिंह राठौर की ओर से आगामी छह सितम्बर को एक संयुक्त बैठक बुलाई जाने का प्रस्ताव आया है , जिसमें इन छह जिलों के अभिभाषक संघों के पदाधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर इस मसले पर उनकी राय व आंदोलन की अगली रणनीति तैयार करने पर विचार-विमर्श करने का सुझाव है ।

इधर बुरहानपुर के विधायक ठाकुर सुरेन्द्र सिंह ने तो मुख्यमंत्री , विधि मंत्री व चीफ जस्टिस को पत्र भेजकर उनके जिले को
इंदौर खंडपीठ में शामिल करने की मांग भी कर दी है ।

इस बीच इंदौर हाई कोर्ट वार अध्यक्ष लोकेश आर भटनागर ने कहा है कि उक्त छह जिले तो इंदौर खंडपीठ में शामिल किए ही जाना चाहिए , साथ ही हमारी यह मांग भी है कि मप्र हाई कोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर की बजाय इंदौर को कर दिया जाए और जबलपुर को खंडपीठ बना दिया जाए, क्योंकि सुविधाओं की बात करें तो इंदौर इस मामले में जबलपुर से काफी आगे है। एयर कनेक्टिविटी से लेकर अन्य तमाम सुविधाओं में इंदौर बेहतर हैं ।

ऐसे में प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से पैरवी के लिए आने वाले वकील आदि को भी इंदौर अधिक सुविधाजनक रहेगा। भटनागर ने कहा कि इस प्रस्ताव को भी हम कार्यकारिणी की बैठक में भी रखेंगे।

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