Jun 25 2019 /
2:57 AM

मप्र में ओबीसी को 14 की जगह 27 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक

जबलपुर। मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाई कोर्ट ने मप्र में ओबीसी को 14 की जगह पर 27 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। सरकार ने इस मामले में विधि विशेषज्ञ से राय लेने की बात कही है।

जस्टिस आरएस झा तथा जस्टिस संजय द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसे लेकर अर्पिता दुबे, ऋचा पांडेय और सुमन सिंह की ओर से एडवोकेट आदित्य सांघी द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि वह नीट परीक्षा-2019 शामिल हुई थी और अगले सप्ताह से उनकी काउंसिलिंग शुरू होने वाली है।

वर्तमान में एससी वर्ग के लिए 16 प्रतिशत तथा एसटी वर्ग के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण है। ओबीसी वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण था, जिसे प्रदेश सरकार ने बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है। इस प्रकार कुल आरक्षण को प्रतिशत 63 प्रतिशत पहुंच जाएगा।

याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी स्थिति में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने गत 8 मार्च को अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण संबंधित एक अध्यादेश जारी किया है। जिसके अनुसार पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 14 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है।

सरकार विधि विशेषज्ञ से राय लेगी

प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने के राज्य सरकार के निर्णय पर हाईकोर्ट में लगी रोक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि हम विधि विशेषज्ञों से सलाह करेंगे।हम 7 दिन की समय सीमा में अपना जवाब पेश कर अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु राज्य में भी 50% के ऊपर आरक्षण है। हम ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने के प्रति वचनबद्ध है।इस वर्ग की भलाई के लिये हम सदैव कार्य करते रहेंगे।

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