वेतन प्रमाणपत्र आय के आकलन का एकमात्र आधार नहीं

नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम इन्दिरो देवी मामले में कहा कि वेतन का प्रमाणपत्र मृतक की आय के निर्धारण का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।
न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें मृतक के आयकर आकलन को आधार बनाकर अधिकरण द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ा दिया।

अधिकरण में दावेदार ने अपने वेतन का प्रमाणपत्र और आयकर आकलन पेश किया था। अधिकरण ने नियोक्ता द्वारा जारी किये गए वेतन के प्रमाणपत्र पर भरोसा करते हुए इसके आधार पर मुआवजा तय कर दिया।

यह कहते हुए कि कि हाईकोर्ट को मुआवजे की राशि नहीं बढानी चाहिए थी और उसे मुआवजे के निर्धारण के लिए वेतन के प्रमाणपत्र पर भरोसा करना चाहिए था, बीमा कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पीठ ने कहा, “…इसमें संदेह नहीं है कि अगर वेतन के प्रमाणपत्र को मानें तो मृतक का वेतन 1,06,176 रुपए प्रतिमाह होता है क्योंकि उसका ग्रॉस वेतन 8848 रुपए प्रति माह था। पर इसका मतलब यह नहीं है कि आयकर आकलन में मृतक ने जो आय बताई है उसको नजरअंदाज कर दिया जाए। अधिकरण के इस मत से सहमत नहीं हुआ जा सकता कि उसकी आय में विरोधाभास को स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।”

विशेष अनुमति याचिका को ख़ारिज करते हुए पीठ ने कहा, “…मृतक ने 2004-2005 आकलन वर्ष के लिए 2,42,606 रुपए की आय का दावा किया था…यह संभव है कि मृतक की आय के अन्य स्रोत भी रहे होंगे। क़ानून में ऐसा कुछ नहीं है कि उचित मुआवजे का आकलन सिर्फ वेतन प्रमाणपत्र के आधार पर ही हो सकता है। (लाइव लॉ से साभार)

 

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