Sep 24 2019 /
2:27 PM

इंदौर में श्वसुर को धीमा जहर देने की आरोपी सॉफ्टवेयर इंजीनियर बहू व उसकी मां की अग्रिम जमानत हाई कोर्ट द्वारा खारिज

-एक जुलाई को कोर्ट में सरेंडर कर जेल भेजने के आदेश

इंदौर। (तेज कुमार सेन)– इंदौर में श्वसुर को धीमा जहर देने की आरोपी सॉफ्टवेयर इंजीनियर बहू व उसकी मां की अग्रिम जमानत हाई कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई है। कोर्ट ने इन दोनों महिला आरोपियों को आगामी एक जुलाई को कोर्ट में सरेंडर करने और वहाँ से जेल भेजने के आदेश दिए हैं।

जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला की बेंच ने इस मामले में इसमे शासन की ओर से योगेश गुप्ता व शिकायकर्ता अमित श्रीवास्तव की ओर से एडवोकेट पीयूष जैन ने तर्क रखे।जिनकी जमानत खारिज हुई उनमें बहू का नाम भावना पांडे और उसकी माँ का नाम कांति पांडे है।

यह है मामला

घटना इंदौर के तिलक नगर थाना क्षेत्र के गोयल नगर स्थित आदिनाथ अपार्टमेंट की है। अमित श्रीवास्तव ने पुलिस को शिकायत की कि मई 2010 में उसने भावना पांडे से प्रेम विवाह किया था। 13 अप्रैल 2011 को अमित की मां सुमन का निधन हो गया। इसके बाद से पिता कभी बड़े भाई के पास दिल्ली में तो कभी इंदौर में अमित के पास रहने लगे।

बीते दो साल से पिता अमित के पास ही रह रहे थे। हालांकि भावना को ससुर के साथ रहना रास नहीं आ रहा था। आरोप है कि भावना ने मई 2017 में ससुर को खाने में जहरीला पदार्थ मिलाकर देना शुरू किया। उनकी तबीयत खराब रहने लगी। पिता की खराब हालत देख अमित को शंका हुई तो उसने भावना के मोबाइल में रिकॉर्डिंग सॉफ्टवेयर डाल दिया।

एक दिन अमित ने भावना और उसके भाई के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग सुन ली। इसमें भावना ने अपने भाई को बताया था कि वह ससुर को धीमा जहर दे रही है। इसके बाद अमित ने भावना के परिवार के लोगों से बात की तो इसकी पुष्टि हो गई। अमित ने मई 2017 में पुलिस को लिखित आवेदन दिया था। सबूत के तौर पर मोबाइल रिकॉर्डिंग और पिता की टेस्ट रिपोर्ट भी दी थी। उसने आवेदन में यह भी लिखवाया कि पत्नी भावना का व्यवहार पूरे परिवार के प्रति अमानवीय रहा है। पति के आरोपों की पुष्टि होने के बाद 25 अगस्त 2018 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की।

आरोपी भावना व उसका पति अमित श्रीवास्तव दोनों ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और वे मूलत: जबलपुर के रहने वाले हैं। दोनों की एक बेटी भी है। ससुर 67 वर्षीय रिटायर्ड बैंक अफसर विनोद कुमार श्रीवास्तव हैं। मई 2010 में अमित ने भावना से प्रेम विवाह किया था।

इस मामले में इन दोनों आरोपियों को हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी। इसमें शासन की ओर से यह कहते हुए इनकी जमानत खारिज़ करने की याचिका लगाई गई कि ये विवेचना में सहयोग नही कर रही है। इसे लेकर कई तथ्य बजी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किये गये जिसके बाद कोर्ट ने उक्त आदेश दिए।

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