Oct 21 2019 /
12:21 AM

आचार्य श्री विद्यानन्द जी मुनिराज का उत्तम समाधि मरण, तीन बार इंदौर आये थे

इंदौर के गोम्मट गिरी का निर्माण उन्ही के सानिध्य में हुआ था

नईदिल्ली। परम पूज्य श्वेतपिच्छाचार्य सिद्धान्त चक्रवर्ती आचार्य श्री विद्यानन्द जी मुनिराज का 22 सितंबर रविवार को 2:40 प्रातः ब्रह्म मुहुर्त में उत्तम समाधि मरण हो गया। वे तीन बार इंदौर भी विहार कर चुके है।

अग्नि संस्कार आज ही श्री कुन्द कुन्द भारती नई दिल्ली के पीछे समाधि स्थल पर होगा। आचार्य विद्यानंद मुनिराज ने यम सल्लेखना धारण किया था। उनका जन्म 22 अप्रैल 1925 को सेतवाल, कर्नाटक राज्य में हुआ।

वे 1972, 1979, 1984 में इंदौर आ चुके है। वे गोम्मटगिरी के निर्माण उनके सान्निध्य में ही हुआ था। मुनिराज ने जिनेंद्रदेव दर्शन कर औत्तमार्थिक प्रतिक्रमण पूर्वक आचार्य श्रुतसागर एवं आचार्य वसुनंदी मुनिराज के ससंघ उपस्थिति में यम सल्लेखना धारण किया था। आचार्य ने आजीवन चारो प्रकार का अन्न जल का त्याग कर दिया था।

नाकोड़ा भैरव भक्त अक्षय जैन ने बताया कि दिगंबर और श्वेतांबर जैन समाज की एकता के लिए आचार्य श्री विद्यानंद जी ने अभूतपूर्व पहल की थी।

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इंदौर