Mar 20 2019 /
4:26 AM

7 मार्च को राहू-केतु करेंगे 18 साल बाद राशि परिवर्तन करेंगे, देखें शुभ, अशुभ प्रभाव

ज्योतिषशास्त्र के सभी नौ ग्रह समय-समय पर अपनी राशि परिवर्तन करते रहते हैं। इनमें से कुछ ग्रह ऐसे हैं जो कि किसी भी एक राशि मे लंबे समय तक बने रहते हैं। इन्हीं में से एक ग्रह राहू व केतु भी है जो कि हमेशा वक्री गति से चलते हैं।

करीब 18 साल राहू मिथुन और केतु धनु राशि में आएंगे। पं. गुलशन अग्रवाल ने बताया कि आगामी 7 मार्च को नवग्रह में शामिल राहू-केतु राशि परिवर्तन करेंगे।

19 सितंबर 2020 तक दोनों इसी राशि में रहेंगे। राहू कर्क व केतु मकर राशि को छोड़ कर अपनी उच्च राशि मिथुन व धनु राशि में प्रवेश करेंगे।

राहू-केतु का परिवर्तन विभिन्न राशियों के व्यक्तियों पर अलग-अलग प्रभाव दिखाएगा। राहु ग्रह राशि परिवर्तन कर मिथुन में प्रवेश करेंगे जो उसकी मित्र राशि होने के साथ ही उच्च राशि भी है। मिथुन राशि का स्वामी बुध है।

वैदिक ज्योतिष में राहू व केतु को छाया ग्रह कहा गया है। यदि कुंडली में राहू मजबूत स्थिति में है तो यह व्यक्ति को जीवन में मान सम्मान व राजनीतिक सफलता प्रदान करता है।

इसके विपरीत यदि कुंडली में राहू की स्थिति प्रतिकूल है तो यह अनेक प्रकार की शारीरिक व्याधियां पैदा करता है। इसे कार्य सिद्धि में बाधा उत्पन्न करने वाला व दुर्घटनाओं को कारक माना जाता है।

7 मार्च को सुबह 5 बजकर 34 मिनट पर राहू व केतु वक्री गति से अपनी राशियों का परिवर्तन कर कर्क व मकर से मिथुन राशि के पुनर्वसु तृतीय चरण व धनु राशि के उत्तराषाढ़ा प्रथम चरण में प्रवेश करेंगे।

ज्योतिष गणना के हिसाब से यह परिवर्तन काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये दोनों राशियां पाराशरी मत से राहू व केतु की उच्च राशि मानी जाती है। अत: इस वर्ष ग्रहों में होने वाला सबसे बड़ा परिवर्तन बहुत हद तक जातक के जीवन की दशा व दिशा को तय करेगा।

पं. गुलशन अग्रवाल ने बताया कि सामान्यत: ये राशि परिवर्तन जहां व्यापारियों के लिए सुखद स्थिति बनाएगा, वहीं राजनीतिज्ञों को भी राहत देगा। इस परिवर्तन का सबसे बड़ा लाभ यह रहेगा कि समस्त असामान्य स्थिति में स्थिरता बनेगी व तरक्की के नए आयाम बनेंगे।

यह बदलाव प्रत्येक राशि के अनुसार अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा। राहू मिथुन राशि में रहेंगे जो उसकी मित्र राशि है। मिथुन राशि का स्वामी बुध है। गं्रथों के अनुसार मिथुन राशि में राहू को उच्च का माना गया है।

केतु का प्रवेश धनु राशि में होगा। इस राशि में शनि भी स्थित है। इस कारण शनि और केतु का योग बनेगा। 18 साल पहले 2001-02 में राहू मिथुन और केतु धनु राशि में थे। 19 सितंबर 2020 तक राहू मिथुन में और केतु धनु राशि में रहेगा।

बदलाव का की राशि पर क्या प्रभाव होगा, देखें

मेष राशि – धन लाभ के योग बनेंगे, भाग्य साथ देगा। समस्याओं से निजात व खुशहाली रहेगी।

वृष राशि – अचानक धन हानि हो सकती है। इसलिए कहीं पर धन निवेश करने और लेनदेन में सावधानी बरतें। व्यापार में नुकसान की आशंका बनी रहेगी, चिंता से उलझन बढ़ेगी।

मिथुन राशि – मन में दुविधा की स्थिति पैदा होगी और काम में बाधांए आ सकती हैं। सामाजिक स्तर गिरेगा, अपराध बोध होगा।

कर्क राशि – खर्चों में बढ़ोत्तरी होगी। शारीरिक कष्ट व दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी।

सिंह राशि – इस राशि के जातकों के लिए राहु और केतु का राशिपरिवर्तन लाभकारी होगा। मान सम्मान बढ़ेगा। परिवार में सुख-शांति आएगी, जटिल समस्याओं का होगा निदान।

कन्या राशि – लाभ के योग हैं। पद प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी किंतु इसी के साथ शारीरिक कष्ट भी हो सकता है।

तुला राशि– छोटे भाई बंधुओं को कष्ट हो सकता है। तुला राशि के यह परिवर्तन सामान्य से कमजोर रहेगा। आर्थिक परेशानी और पारिवारिक दिक्कतों का करना पड़ेगा सामना।

वृश्चिक राशि– इस राशि के जातकों को शारीरिक कष्ट और दुविधा की स्थिति देखनी पड़ सकती है। लेकिन कार्यक्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा, होगा आर्थिक लाभ।

धनु राशि– इस राशि के जातकों में दामपत्य प्रेम बढ़ेगा। लेकिन व्यापार में धनहानि की आशंका बनेगी।

मकर राशि– इस राषि के जातको के लिए परिवर्तन शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला होगा। लेकिन शारीरिक चोट, शत्रुओं से भय के साथ वाहन दुर्घटना की आशंका।

कुंभ राशि– पुत्र या पुत्री के कार्य में बाधाएं आ सकती हैं। लेकिन सामाजिक यश-कीर्ति में बढ़ोतरी, आर्थिक लाभ।

मीन राशि– इस राशि के जातकों को अगले डेढ़ साल तक घरेलू कष्ट देखने को मिल सकता है। लेकिन सम्मान और वैभव के साथ आर्थिक लाभ मिलेगा।

Spread the love

इंदौर