सोमवती अमावस्या 14 दिसम्बर को वर्ष का अन्तिम खग्रास सूर्यग्रहण,भारत मे कोई प्रभाव नही, न सूतक लगेगा न मन्दिर के पट ही बंद होंगे

वर्ष 2020 का अंतिम व वर्ष का दूसरा सूर्य ग्रहण सोमवती अमावस्या को 57 वर्षों के बाद विशेष ग्रह युति के साथ घटित होगा। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की सोमवती अमावस्या को भारतीय समयानुसार भूमण्डल पर यह 14 दिसम्बर की शाम 7 बजकर 03 मिनिट पर प्रारम्भ होकर अर्धरात्रि 12 बजकर 23 मिनिट अर्थात 5 घण्टा 20 मिनिट तक रहेगा।


आचार्य रामचन्द्र शर्मा ‘वेदिक’ ने बताया कि यह ग्रहण ज्येष्ठा नक्षत्र व वृश्चिक राशी में हो रहा है। यह भारत मे दृश्य नही होगा।यह अमेरिका, अफ्रीका के कुछ भागों में व प्रशान्त व हिन्द महासागर आदि में दृश्य होगा। जहां दिखेगा वहां सूतक आदि लगेगा। भारत में इसका कोई धर्मिक प्रभाव नही होगा।


राशियों पर प्रभाव


ग्रहण का प्रभाव विभिन्न राशियों पर इस प्रकार पड़ेगा- मेष, सिंह, वृश्चिक व मीन के लिए अशुभ रहेगा, वृषभ, कर्क,तुला व मकर के लिए शुभ व शेष के लिए मिला-जुला रहेगा।

साभार- आचार्य पण्डित राम चन्द्र शर्मा वैदिक, इंदौर

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इंदौर