Mar 20 2019 /
4:27 AM

अन्ना (रमेश राव) को नहीं छोड़ता क्रिकेट

गौरीशंकर दुबे
एनआर विनयकुमार, मयंक अग्रवाल, मनीष पांडे, अभिमन्यु मिथुन और करुण नायर जैसे खिलाड़ी उम्रदराज रमेश राव को अन्ना पुकारते हैं। वे टीम के मैनेजर तो हैं हीं, लेकिन जब खिलाड़ी उनसे प्रेम मोहब्बत से पेश आते हैं, तो लगता है

कि वे यह क्रिकेट टीम नहीं बल्कि परिवार है। जब चार साल पहले कर्नाटक ने लगातार दो बार रणजी ट्रॉफी जीती, तो अन्ना ने राज्य क्रिकेट एसोसिएशन से कहा कि अब उन्हें काम से हमेशा के लिए छुट्टी दे दी जाए।

एसोसिएशन ने यह कहकर मना कर दिया कि खिलाड़ी नहीं मानेंगे, इसलिए वे टीम के साथ बने हुए हैं। अन्ना विवि स्तर का क्रिकेट खेले हैं, लेकिन उनके मैनेजमेंट की पूछपरख बीसीसीआई में भी है, तभी बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम स्थित नेशनल क्रिकेट एकेडमी में उन्होंने दस साल तक सलाहकार की भूमिका निभाई थी।

वे भलें ही अब पद पर नहीं हैं, लेकिन आज भी दोपहर तीन से शाम छह बजे तक क्रिकेटरों की सेवा करते हैं। ऐसा कोई दिन जाता हो, जबकि एनसीए में कोई स्टार क्रिकेटर न खेल रहा होता हो। एनसीए स्पिन डायरेक्टर नरेंद्र हिरवानी को बोलकर अन्ना गेंदबाजों का बंदोबस्त कराते हैं।

एनसीए में 32 विकेट हैं। एक सीमेंट और बाकी टर्फ। यजुवेंदर चहल कैसे यो यो टेस्ट पास कर लेते हैं?, जवाब में अन्ना साउथ इंडियन फिल्मों के विलेन की तरह हंसते हैं। वे कहते हैं इंदौर में क्रिकेट का ढांचा कैसा है, मुझे नहीं मालूम, लेकिन बंगलुरु में ही साढ़े बारह से क्लब ए से एच डिवीजन तक खेलते हैं।

करुण नायर, लोकेश राहुल, मयंक अग्रवाल, मनीष पांडे, आर विनय कुमार जैसे क्रिकेटर फर्स्ट डिवीजन लीग खेलते ही खेलते हैं, बशर्ते नेशनल ड्यूटी या आईपीएल न खेल रहे हों। अन्ना कभी काम के बदले पैसा नहीं लेते।

यही बात वे अनिल कुंबले, जावागल श्रीनाथ, वैंकटेश प्रसाद, डेविड जॉनसन, सुनील जोशी के बारे में कहते हैं। रणजी सहित राज्य की हर उम्र की टीम को ये सभी समय -समय पर खेल की बारीकियां और सफलता के तरीके सिखाते हैं। अन्ना ब्रजेश जोशी के खास हैं। एक बार उनकी बात निकल आए, तो घंटेभर बोलते हैं।

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इंदौर