Jun 25 2019 /
3:18 AM

हिरासत में मौत, 2 पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा

तिरुवनंतपुरम। पुलिस हिरासत में पिटाई से युवक की मौत के 13 साल पुराने मामले में बुधवार को एक बड़ा फैसला आया। 26 साल के युवक की मौत के मामले में तिरुवनंतपुरम की सीबीआई कोर्ट ने केरल के दो पुलिसकर्मियों को (मौत) फांसी की सजा सुनाते हुए उन पर दो-दो लाख का जुर्माना भी लगाया।
सीबीआई कोर्ट के जज के. नजर ने कहा कि इस केस में मुख्य आरोपी के जीत कुमार और एसवी श्रीकुमार ज्यादा से ज्यादा सजा के हकदार हैं, क्योंकि यह अपराध रेयरेस्ट ऑफ रेयर है। इसी केस में तिरुवनंतपुरम के तत्कालीन एसीपी के हरिदास, सर्कल इंस्पेक्टर ईके सबू और सब इंस्पेक्टर अजीत कुमार को सबूत मिटाने का दोषी माना गया।
ऐसा माना जा रहा है कि यह पहली बार है कि जब केरल में दो सेवारत पुलिस अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई है। मामले में तीन अन्य आरोपियों टी के हरिदास, ई के साबू और अजीत कुमार को सबूत नष्ट करने तथा साजिश रचने के लिए तीन साल की जेल की सजा सुनाई है।
तीसरा आरोपी के वी सोमन की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी जबकि एक अन्य आरोपी वी पी मोहनन को अदालत ने पहले बरी कर दिया था। अदालत ने सभी आरोपियों पर पांच पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
मृतक के शरीर पर चोट के 40 निशान मिले थे सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, पुलिस ने सितंबर 2005 में एक पुराने मामले में स्क्रैप डीलर उदय को हिरासत में लिया था। चोरी का आरोप लगाकर उसे प्रताड़ित किया और चार हजार रुपए छीन लिए थे। जब वह रुपए मांगने के लिए थाने गया तो दोबारा उसके साथ मारपीट की गई। इसके अगले दिन उदय की मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर चोट के 40 निशान मिले थे। जांच एजेंसी ने लोहे का एक पाइप भी कोर्ट में पेश किया, जिससे युवक की पिटाई की गई थी। 13 साल बाद इस केस में फैसला आया। मृतक की 68 वर्षीय प्रभावती ने यह कानूनी लड़ाई लड़ी।

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इंदौर