Jan 24 2019 /
12:11 AM

मोदी का जादू बेअसर, गडकरी को डिप्टी पीएम, शिवराज को पार्टी अध्यक्ष बनाओ, भाजपा के बुजुर्ग दलित नेता संघप्रिय गौतम की मांग

मेरठ। भारतीय जनता पार्टी के बुजुर्ग दलित नेता और एक समय में सरकार और संगठन की मुख्यधारा के नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री संघप्रिय गौतम पार्टी के मौजूदा हालात से खुश नहीं हैं।

इसको लेकर उन्होंने खुला पत्र लिखा है। वह पार्टी द्वारा देश के ज्वलंत मुद्दों को भूलकर धार्मिक मुद्दों को उठाए जाने से खफा हैं। पांच राज्यों में हार के बाद उनको लगता है कि फिलहाल मोदी और शाह का जादू बेअसर होने लगा है।

गौतम 2019 में बीजेपी की सरकार और मोदी को पीएम देखना तो चाहते हैं लेकिन संगठन और सरकार में बदलाव के पक्षधर हैं। उनकी राय है कि सीएम योगी को हटाकर राजनाथ सिंह को यूपी का सीएम, शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और नितिन गडकरी को डेप्युटी पीएम बनाया जाना चाहिए।

इस बाबत गौतम ने बाकायदा पत्र के जरिए अपनी राय जाहिर की है। ‘नवभारत टाइम्स’ की खबर के अनुसार गौतम ने कहा, ‘2014 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत से नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व ऊंचा हुआ था।

उनकी नीतियों से देश का नाम दुनिया में हुआ, संगठन का विस्तार हुआ, केंद्र के अलावा 22 राज्यों में बीजेपी की सरकार बनी। 2017 में यूपी में जब पार्टी जीती, तबतक मोदी मंत्र और अमित शाह का चक्रव्यूह सिर पर चढ़कर बोल रहे थे लेकिन यूपी चुनाव जीत के बाद दोनों के जादू को ग्रहण लगने लगा, जिसके असर के चलते बीजेपी को उपचुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा।

गौतम के मुताबिक, संविधान को बदलने की बात करना, संविधान से छेड़छाड़ करना, योजना आयोग को नीति आयोग में बदलना, सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई, सीबीआई आदि संवैधानिक संगठनों में दखलंदाजी, आर्थिक क्षेत्र में लिए निर्णय ने बुद्धिजीवियों, संविधान प्रेमियों और लोकतंत्र की हामियों पर असर डाला।

मणिपुर और गोवा में जोड़-तोड़ की राजनीति से सरकार बनाना, उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाना, कर्नाटक में एक दिन की सरकार बनाना विवेकहीन निर्णय रहे।

अपने खुले पत्र में गौतम आगे लिखते हैं कि नौजवानों को रोजगार मुहैया नहीं कराना, किसानों का कर्जा माफ नहीं करना, गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं करना, किसानों को लागत मूल्य अनुसार उपज के दाम नहीं दिलाना, इन चीजों का काफी नकारात्मक असर पड़ा।

भ्रष्टाचार, महंगाई और कालाधन जैसे मुद्दों को छोड़कर धर्म, मंदिर-मस्जिद, शहरों के नामकरण, गोकशी के नाम पर भीड़ हिंसा को बढ़ावा मिलना, ऐसे मुद्दे हैं जिनकी वजह से जनता का विश्वास उठ गया।

साथ ही देश में जाट आरक्षण, पटेल आरक्षण, गुर्जर आरक्षण, ब्राह्मण आरक्षण, मराठा आरक्षण और एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर दलित आंदोलन होने लगे।

पाकिस्तान सीमा पर हर दिन जवानों को मार रहा है और हम केवल शहीद कहकर संतोष कर रहे, ये सब ऐसे सवाल है जिनसे आम आदमी की आस सरकार से उठने लगी है।

गौतम सार्वजनिक चिट्ठी में यहीं नहीं रुके, उन्होंने लिखा कि मोदी मंत्र और अमित शाह का चक्रव्यूह हाल में पांच राज्यों के चुनाव में निष्प्रभावी हो गया। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पार्टी की सरकार चली गई।

इनकी हार की जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी और अमित शाह को खुद लेनी चाहिए। जल्द लोकसभा चुनाव होने हैं, लेकिन हालात से ऐसा लगता है कि अब मोदी मंत्र कारगर नहीं होगा।

पार्टी कार्यकर्ता सारे देश में निराश और हताश हो रहे हैं। गौतम ने कहा कि बीजेपी का सत्ता में आना और मोदी का पीएम बनना तो जरूरी है, लेकिन साथ ही सरकार और संगठन में बदलाव जरूरी है, इसके लिए नितिन गडकरी को डेप्युटी पीएम बना देना चाहिए।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को धार्मिक कार्य में लगाकर उनकी जगह गृहमंत्री राजनाथ को सीएम बनाना चाहिए। अमित शाह को राज्यसभा में कमान संभालनी चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष की बागडोर शिवराज सिंह चौहान को सौंपी जानी चाहिए। इस बदलाव से वर्करों में विश्वास बढ़ेगा।

कौन है गौतम

संघप्रिय गौतम बीजेपी के संस्थापक सदस्य हैं और वह पार्टी का दलित चेहरा रहे हैं। टीम अटल और आडवाणी का सदस्य रहने के साथ-साथ वह सांसद और राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं।

राज्यसभा में बीजेपी के सचेतक और कई संसदीय समितियों के सदस्य के तौर पर भी उन्होंने काम देखा है। बीजेपी संगठन में राष्ट्रीय महासचिव और सचिव के साथ प्रवक्ता तो सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रहे हैं। बीजेपी में गौतम ने एक मुखर वक्ता के तौर पर पहचान बनाई है और फिलहाल वह मुख्यधारा से अलग हैं।

Spread the love

इंदौर