Sep 23 2019 /
10:34 AM

इंदौर हाई कोर्ट में 7 जिले शामिल करने को लेकर वकील आमने सामने, 3 सितंबर को समर्थन में इंदौर में हस्ताक्षर अभियान, जबलपुर में विरोध में काम बंद

इंदौर। इंदौर हाई कोर्ट में सात जिले शामिल करने के प्रस्ताव को लेकर मप्र के दो जिलों के वकील आमने सामने आ गए है। इसे लेकर आगामी 3 सितंबर को जहाँ इस प्रस्ताव के समर्थन में इंदौर में वकीलो का हस्ताक्षर अभियान चलेगा वही जबलपुर में विरोध में हाई कोर्ट से लेकर जिला कोर्ट के वकील न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।

इंदौर में उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ की कार्यकारिणी की आपातकालीन मीटिंग हुई। बार अध्यक्ष लोकेश भटनागर, उपाध्यक्ष अमरसिंह राठौर ने बताया कि इसमे यह निर्णय लिया गया कि मप्र के भोपाल,हरदा, हरसूद, खंडवा, बुरहानपुर, सीहोर और आष्टा जिले को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में शामिल किए जाने के समर्थन हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा तीन सितंबर मंगलवार को हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा साथ ही उक्त दिनांक को सभी अधिवक्ताओं द्वारा सफ़ेद पट्टी बाँध कर पैरवी की जाएगी, और आगे इस अभियान को योजनाबद्ध तरीके से सार्थक किया जायेगा।

इधर जबलपुर के वकील इस प्रस्ताव के विरोध में है। जबलपुर हाई कोर्ट बार ओर वहा के जिला बार ने उस प्रस्ताव के विरोध में 3 सितंबर को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है।

यह जानकारी बार क पदाधिकारी मनीष तिवारी, हरप्रीत रूपराह व राजेश तिवारी द्वारा जारी प्रेस नोट में दी गई। इस बीच इंदौर के एक अधिवक्ता मनीष यादव ने भी राष्ट्रपति व अन्य को पत्र भेजकर सीहोर, हरदा, खंडवा व बुरहानपुर जिले को इंदौर खंडपीठ में शामिल करने की मांग की है।

दूरी का है मामला

दरअसल यह सारा मामला दूरी को लेकर है। इंदौर के वकीलों का कहना है कि आसपास के उक्त जिले इंदौर के नजदीक है जबकि जबलपुर की दूरी काफी अधिक है, जिससे पक्षकारों व वकीलो को आने जाने में काफी दिक्कत होती है। इस कारण इन सातों जिलों को इंदौर खंडपीठ में शामिल कर लिया जाए जबकि जबलपुर के वकील इसके विरोध में है।

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